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मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम

 


मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम

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अल्लाह के प्यारो की विलादत का तजकिरा रब्बुल इज़्ज़त की अपनी सुन्नत है ! अल्लाह तआला ने कुरआने करीम में बार बार हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तख़लीक़ का ज़िक्र फ़रमाया ! और इसकी . तफ़सीलात बयान की।

जन्नत में उनका क़याम व तआम और जमीन पर हुबूत के वाकेआत बयान फरमाए ! हज़रत इस्हाक़ अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की विलादत और बच्पन के हालात बयान फ़रमाए ! फिर हज़रत मरियम अलैहस्सलाम की विलादत और उनके बच्पन का हाल बयान फरमाया !

हज़रत यहया अलैहिस्सलाम की विलादत और उनके बचपन के हाल का जिक्र फ़रमाया और नफखे रूह के जरिए हज़रत मरियम अलैहिस्सलाम के हमल से लेकर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की विलादत तक का पूरा वाकिया बयान किया ।

जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम
वक़्ते विलादत हज़रत मरियम अलैहिस्सलाम को उस वक्त कूदरते इलाहिया से जो खुराक खजूरें और ” पानी मुहय्या किया गया उसका बयान किया हत्ता कि उनकी कौम के ताअने आपकी खामोशी और इशारे से जवाब ! अल गर्ज हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का बोलना और आप का इब्तिदाई कलाम जो आपने गहवारे में किया ! सब कुछ बयान फ़रमाया !

अगर अल्लाह तआला चाहता तो दो जुमलों में हज़रत इसा अलैहिस्सलाम के मख़लूक़ होने और मुतवल्लद होने का बयान हाे सकता था ! मगर उसने अपने प्यारो की विलादत का तफसील से जिक्र फ़रमाया ! और उस अमल को हमारे लिए कुरआनी हुक्म और अपनी सुन्नत बना दिया !

फिर कायनात में हुजूर सल्लल्ताहो अलैहि वसल्लम से बढ़कर अल्लाह का प्यारा और कौन हो सकता है ! इसलिए अंबियाए किराम की विलादतों का फ़क़त बयान फरमाया ! मगर हुजूर सल्लल्लाहो अलैहै वसल्लम की विलादते मुतह्हरा की निस्बत से क़सम खाई और इर्शाद फ़रमाया:

मै’ इस शहर (मक्कह) की कसम खाता हू ! और आप इसी शहर में रहते हैं और क़सम है ! बाप की और उसकी औलाद की।

इन आयात मे’ हूजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के शहरे विलादत मवकह की कसम खाईं गई ! आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के कयाम और रहन सहन की कसम खाईं गई


आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के वालिद माजिद या जद्दे अमजद की कसम खाईं गई ! और बिल आखिर आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के पूरे नसबे मुबारक और मीलादे पाक का बयान बसूरते कसम आ गया ! यही सुन्नत हमने इस मज़मून मैं अपने पेशे नज़र रखी हैं।

अगर कल्बे सलीम हो तो इसी कद्र कसम काफी है ! यही वजह है कि सहाबए किराम से लेकर मौजूदा ज़माने तक हर दौर में असलाफ़ और बुजुर्गाने दीन अपने अपने तरीके और ज़ोक व तहक़ीक़ के मुताबिक हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के मिलादे मुबारक का जिक्र करते रहे !

इस पर रसाएल और किताबे’ लिखते रहें ! और’ विलादते मुतह्हरा के वाक़ेआत अजाइबात रिवायत करते रहे और महफिल और मजालिस मैं उन्हे’ पढ़ कर सुन कर और सुना कर ईमान व मुहब्बत की ताज़गी का सामान फराहम करते रहे ! तारीखे इस्लाम का कोई ज़माना इस मुबारक और महबूब अमल से खाली न रहा !

इसलिए हुजूरे इलाही में इल्तिजा है कि आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि विलादत के ज़िक़्रे पाक की बरकत से हमारे ईमान में भी इजाफा फ़रमाए ! और हमें सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की मुहब्बत की दौलते उज़्मा में से खैरात अता फ़रमाए। ( आमीन, बीजाहे सय्यदिलमुर्सलीन सल्लल्लाहो अलैहै वसल्लम ) .

जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम
अल्लाह तआला इर्शाद फ़रमाता है – फरमा दीजिए यह अल्लाह के फ़ज़्ल और उसकी रहमत से है इस पर खुशी मनाए वह उन सब धन दौलत से बेहतर है ‘ ‘ । ( सूरए यूनुस…53 )

रब्बूल इज़्ज़त “वहदहू ला शरीक ने नूरे मुजस्सम नबी मुकर्रम सल्लल्लाहो अलैहै वसल्लम को इस दुनियाए आब व गिल में इंसानी की हिदायत व रहनुमाई के लिए भेजा ! जिनका नूर अल्लाह करीम ने सबसे पहले पैदा फ़रमाया था !

आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की तशरीफ़ आवरी से इंसानी ज़िंदगी में ऐसा इंक़लाब बरपा हुआ कि आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने रंग व नस्ल के तमाम इम्तियाजात ख़त्म करके इत्तीहाद व यगानगत और उखुव्वत व मुहब्बत का ऐसा मज़बूत रिश्ता कायम फ़रमाया जिससे आका व गुलाम और अरबी ब अजमी का इम्तियाज जाता रहा !

इंसाफ़ और मआशी मुसावात का सबक सिखा कर ! तहजीब ब मुआशरत की इस्लाह कर के ऐसा बेमिस्ल मुआशरा तश्कील दिया ! जिसकी नजीर इस कुरए अर्ज मे नहीं मिलती !

इस लिहाज़ से इस दुनिया में आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि तशरीफ़ आवरी का दिन बडा अहम और यादगार दिन है


इस दिन की कद्र व मजिलत हर एहसान शख्स के दिल में मौजूद है ! बल्कि सच तो यह है कि जिस मुसलमान के दिल मे आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि मुहब्बत मोजज़न नहीं ! वह अपने दावाए ईमान मैं झूठा हैं !

इशांदे रिसालतम आब सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम है

तुम में से कोई शख्स उस वक़्त तक अपने दावाए ईमान में सादिक नहीं है ! जब तक वह मेरी मुहब्बत को अपने बाप अपने बेटे और दुनिया के सब लोगों की मुहब्बत पर तरजीह नहीं देता !

बुख़ारि सफ़्हा – 7 नसई, मुस्लिम)

जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम
हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम से दिली मुहब्बत व अक़ीदत का तकाजा यही है कि हर मुसलमान आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि यौमे विलादत बासआदत के मौके पर बिलख़ुसूस और सारा साल बिल उमूम फरहत व सुरूर का इज़हार करें !

इर्शादे बारी तआला है ! ‘ ऐ लोगो ! तुम्हारे पास रब की तरफ़ से नसीहत आई ! और दिलों की सेहत और हिदायत और ऱहमत, ईमान वालों के लिए फरमा दीजिए उसके फ़ज़्ल और उसकी रहमत से उस पर चाहिए कि वह खुशी . करें ! वह बेहतर हैं ! इस से कि वह जमा करते हैं !

(पारा- 11 रुकू -10 )

यह बात अजहर मिनश शम्स है कि अल्लाह तआला की हर अता और हिदायत व रहमत नबी करीम सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम की मरहूने मन्नत है ! और अल्लाह तआला की सबसे बडी रहमत व नेमत सरवरे कायनात सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि जाते अक़दस है !

आयते मुतजक्किरा बाला में इन सब चीजों पर फरहत व इन्बिसात का हुक्म मुज़मर है ! यह वह नेमतें है ! जो हर नेमत व दौलत से अफ़ज़ल व अकमल है !

लिहाजा नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि आमद की जिस कद्र भी ख़ुशी मनाईं जाए ! और आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि रहमतो और बरकतो का ज़िक्र किया जाए , कम है


नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने एक मौके पर इर्शाद फरमाया

मैं मुहम्मद ( सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ) हू ! अब्दुल्लाह का बेटा और अब्दुल मत्तलिब का पोता ! अल्लाह तआला ने मखलूक़ को पैदा किया ! मुझे अच्छे गिरोह मे बनाया ! यानी इंसान बनाया !

इंसानो’ में गिरोह पैदा किए ! अरब और अजम और मुझे अच्छे गिरोह यानी अरब से बनाया ! फिर अरब में कई कबीले बनाए और मुझ को सबसे अच्छे कबीले कूरैश मे बनाया ! फिर कूरेैश मे कई खानदान बनाए ! मुझकों सबसे अच्छे खानदान में पैदा किया यानी बनू हाशिम में ! पस मै जाती तौर पर सबसे अच्छा हूँ ! और खानदान में भी सबसे अच्छा हूँ । ( मिश्क़ात शरीफ़ सफूहा 513 ) ‘

इस हदीसे मुबारका से मालूम हुआ कि नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने खुद महफिले मीलाद मुनअकिद फरमा कर ! अपना हसब नसब इर्शाद फ़रमाया !

जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम
इमाम अब्दुर्रज्जाक़ ने सनद के साथ हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी रजियल्लाहू अन्हु से रिवायत किया है कि मैंने अपने आका सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम से अर्ज किया कि मेरे मां बाप आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर फिदा हों !

मुझ को खबर दीजिए कि सब अशिया से पहले अल्लाह तआला ने कौन सी चीज़ पैदा की ! आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया ‘ ‘ ऐ जाबिर ! अल्लाह तआला ने तमाम अशिया से पहले तेरे नबी का नूर अपने नूर से पैदा किया ! फिर वह नूर कुदरते इलाहिया से जहां अल्लाह को मंजूर हुआ सैर करता रहा !

उस वक़्त न लोह थी न कलम था, न बहिश्त थी न दोज़ख़ था, न फ़रिश्ता था ! न आसमान था, न ज़मीन थी , न सूरज न चांद था न जिन्न और न इंसान था !

फिर जब अल्लाह तआला ने मखलूक़ को पैदा करना चाहा ! तो उस नूर के चार हिस्से किए और एक हिस्से से कलम पैदा किया और दूसरे से लौह और तीसरे से अर्श !

आगे तवील हदीस है। जिसका मज़मून यह है कि फिर सारी कायनात की तख़लीक़ उसी नूर के तवस्सुत से हुईं !’ हज़रत इमाम
क़स्तलानी रहमतुल्लाह अलैह ने रिवायत किया है ” कि अल्लाह तआला ने नूरे मुहम्मदी को हुक्म फ़रमाया कि अन्वारे अंबिया पर तवज़्ज़ोह करे


पस हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के नूरे मुबारक़ ने दीगर अंबियाए किराम की अरवाह व अनवार पर तवज्जोह फ़रमाई तो उस नूर ने उन सब अनवारे को ढांप लिया ! उन्हों ने अर्ज की बारी तआला हमें किस ने ढांप लिया है तो अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया यह मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का नूर है !
अगर तुम उन पर ईमान लाओगे तो तुम्हें शर्फ़े नबूव्वत से बहरावर किया जाएगा ! इस पर सब अरवाहे अंबिया ने अर्ज किया ! बारी तआला हम उन पर ईमान लाए हैँ ! इसका मुकम्मल जिक्र सूरए आले इमरान की आयत 3 – 81 में है !

जिसका तर्जुमा यह हैँ । याद करो उस वक्त को जब अल्लाह तआला ने तमाम अंबिया से यह अहद लिया कि जब मैँ तुम्हें किताब और हिकमत अता कर के मबऊस करूं तो इसके बाद आप के पास मेरा प्यारा रसूल आ जाए ! तो सब उस पर ईमान लाना ! और उसके मिशन की मदद करना !
हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि सहाबए किराम ने पूछा ! या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम आपके लिए नबूव्वत किस वक़्त साबित हो चुकी थी ! आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, उस वक्त जब कि आदम अलैहिस्सलाम अभी रूह और जस्द दर्मियान थे – यानी उनके तन मे जान भी नहीं आईं थी !
( तिर्मिज़ी )

हज़रत इरबाज़ बिन सारिया रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि बेशक मैं हक तआला के नज़दीक खातिमुन नबीइन हो चुका था ! और आदम अलैहिस्सलाम अभी अपने खमीर ही मे थे ! यानी उनका पुतला भी तय्यार न हुआ था ”
(अहमद और बैहक़ी )

अहकाम बिन अलकत्तान में हज़रत इमाम जैनुल आबेदीन रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है ! वह अपने बाप इमाम हुसैन रजियल्लाहु अन्हु और वह उनके जद्दे अमजद यानी हज़रत अली रजियल्लाहु अन्हु से नक़्ल करते है
कि नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया कि मैँ हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के पैदा होने से चौदह हजार साल पहले अपने ” परवरदिगार के हुजूर में एक नूर था
हज़रत मैसरा रजियल्लाहु अन्हु से मंकूल है कि मैंने बारगाहे नबूव्वत सल्लल्लाहौ अलैहे वसल्लम मैं अर्ज किया कि हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम आप कब से शर्फ़े नबूव्वत के साथ मुशर्रफ़ हो चुके थे !

जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम

नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया जब अल्लाह तआला ने ज़मीन को पैदा फ़रमाया और आसमानों की तरफ़ कस्द फरमाया और उनको सात तब्क़ात की सूरत मे तख़लीक़ फरमाया !
और अर्श को उनसे पहले बनाया तो अर्श के पाये पर मुहम्मद रसूलअल्लाह ख़ातिमुल अंबिया लिखा ! और जन्नत को पैदा फरमाया ! जिस में अज़ां हज़रत आदम अलैहिस्सलामऔर हज़रत हव्वा अलैहस्सलाम के रूह व् जिस्म का बाहमी तअल्लुक नहीं हुआ था !
पस जब उन की रूह को जिस्म ,मैं दाखिल फ़रमाया और जिन्दगी अता फरमाई ! तब उन्होंने अर्श मुअज़्ज़म की तरफ़ निगाह उठाई ! तो मेरे नाम को अर्श पर लिखा हुआ देखा !
उस वक़्त अल्लाह तआला ने उन्हे बताया कि यह तुम्हारी औलाद के सरदार हैं ! जब उनको शैतान ने धोका दिया उन्हों ने बारगाहे इलाही में तौबा की ! और मेरे नाम से ही शफाअत तलब की ( मुहद्दिस इब्ने जौजी ने इसे अल वफा में रिवायत की है )
फायदा: – इस से आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि फ़जीलत का इज़हार आदम अलैहिस्सलाम के सामने करना मकसूद था !
मरवी है कि अबू लहब की बांदी सौबिया भी विलादते बा सआदत के वक्त हज़रत आमना के पास हाजिर थी ! उसने आप को दूध पिलाया तो सौबिया ने आपकी विलादत और अपने शर्फ़े रजाअत की खुशख़बरी अबू लहब को सुनाई तो उसने खुश हो कर दो उंगलियों ( अंगुश्ते शहादत और दर्मियानी उंगली) से इशारा करते हुए सौबिया को आजाद कर दिया !
सहीं बुखारी मे है कि मरने के बाद उसे हज़रत अब्बास रजियल्लाहू अन्हु ने ख़्वाब में देखा और पूछा कि तुम्हारा क्या हाल है ! तो उसने जबाब दिया कि जहन्नम के सख्त अज़ाब मे गिरफ्तार हूँ !
मगर जब पीर (सोमवार) को रात ( जो हूजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम कि शबेविलादत थी ) आती है तो मेरे अजाब मैं कमी कर दी जाती है ! और उन दो ऊंगलियाँ को चूसता रहता हू ! जिनके ज़रिए हुजूर सल्लल्लाहो अलैहै वसल्लम की विलादत की खुशी में इशारा करके सौबिया को आजाद किया था ! उनमें से ठंडा पानी निकलता हैं जिसे पी कर प्यास बुझाता हूँ !
अइम्मा व मुहद्दिसीन औऱ अकाबिर उलमाए उम्मत बयान करते हैं ! कि एक काफिर को हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की बिलादते मुबारका पर खुशी के इज़हार किए गए अमल पर अजाब मे तखफोफ़ मिल गई ! जब कि कुफ़्फ़ार का कोई अमल आखिरत में बाइसे अज्र नहीं होता है !
महज़ हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के खसाएल और बरकात में है !

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