हदीस शरीफ़ हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं के क़ियामत के दिन अल्लाह के कुछ बन्दे ऐसे होंगे जो ना नबी होंगे और ना शुहदा मगर उनके मक़ाम और बुलंदी को देखकर बाज़ अम्बिया और शुहदा भी रश्क करेंगे, अबू दाऊद,जिल्द 3,सफह 288,) अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरान ए मुक़द्दस में इरशाद फरमाता है के तर्जमा “बेशक अल्लाह के वली मुत्तक़ी ही होते हैं “ पारा 9,सूरह इंफाल,आयत 34, दोस्तो तक़वा परहेज़गारी खशीयत बग़ैर इल्म के नामुमकिन है जैसा के मौला तआला क़ुरान में इरशाद फरमाता है के तर्जमा “अल्लाह से उसके बन्दों में वोही डरते हैं जो इल्म वाले हैं, पारा 22, सूरह फातिर,आयत 28 क़ौल हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़िअल्लाहु तआला अन्ह फरमाते हैं के तसव्वुफ़ सिर्फ गुफ्तुगू नहीं बल्के अमल है, और फरमाते हैं के जिस हक़ीक़त की गवाही शरीयत ना दे वो गुमराही है, फुतुहूल ग़ैब,सफह 82, क़ौल हज़रत मुजद्दिदे अल्फे सानी रज़िअल्लाहु तआला अन्ह फरमाते हैं के जो शरीयत के खिलाफ हो वो मरदूद है, मकतूबाते इमाम रब्बानी,हिस्सा 1,मकतूब 36,) हज़रत सिहाब-उद्दीन सोहरवर्दी रज़िअल्लाहु तआला अन्ह फरमाते हैं के जिसको शरीयत रद्द फरमाये वो हक़ीक़त नहीं बेदीनी ...